स्वागतम राष्ट्रीय कवि संगम

दो में से क्या तुम्हे चाहिए कलम या कि तलवार, मन में ऊँचे भाव कि तन में शक्ति अजेय अपार|
अंध कक्षा में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान, या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान|

कलम देश की बड़ी शक्ति है भाव जगाने वाली, दिल ही नहीं दिमागों में भी आग लगाने वाली|
पैदा करती कलम विचारों के जलते अंगारे, और प्रज्वलित प्राण देश क्या कभी मरेगा मारे|

एक भेद है और वहाँ निर्भय होते नर -नारी, कलम उगलती आग, जहाँ अक्षर बनते चिंगारी|
जहाँ मनुष्यों के भीतर हरदम जलते हैं शोले, बादलों में बिजली होती, होते दिमाग में गोले|

जहाँ पालते लोग लहू में हालाहल की धार, क्या चिंता यदि वहाँ हाथ में नहीं हुई तलवार |

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल, नम होगी यह मिट्टी ज़रूर, आँसू के कण बरसाता चल।
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